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नवी मुंबई: समुद्री इलाके में मैंग्रोव क्षेत्र से बाहर निकाला 7 हजार किलो कूड़ा 

ByAkhlaque Sheikh

Dec 10, 2020


कूड़ा – सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : PTI

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उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के मूल निवासी धर्मेश बरई के एक छोटे से समूह ने बड़ी पहल कर सेटेलाइट सिटी कही जाने वाली नवी मुंबई के समुद्री इलाके में मैंग्रोव क्षेत्र से 7000 किलोग्राम कूड़ा निकालकर बड़ी मिशाल कायम की है। इससे न केवल पर्यावरण अनुकूल माहौल बना बल्कि अब यहां राजहंस जैसे कई पक्षी खुलकर सांस ले पा रहे हैं और रैन बसेरा करते दिखाई देते हैं। अब तो इस क्षेत्र में फ्लैमिंगों पक्षियों का भी आगमन शुरू हो गया है।

बलरामपुर के धर्मेश बरई के छोटे समूह की बड़ी पहल
एनवारयरमेंटल लाइफ के संस्थापक धर्मेश बरई नवी मुंबई में रहते हैं। लेकिन वे बलरामपुर जिले में अतरौरा स्थित लालाडिहवा गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने नवी मुंबई के नेरूल में समुद्री प्रशिक्षण संस्थान टी.एस.चाणक्य से थोड़ी दूर स्थित करावे गांव के पास मैंग्रोव क्षेत्र को कूड़ा मुक्त करने की पहल की।

मछुआरों इसी कूड़े के रास्ते से होकर मछली पकड़ने के लिए जाते हैं। धर्मेश ने बताया कि रोशन भोसले और श्रीराम शंकर नामक दो क्लीनअप स्वयंसेवकों के साथ मिलकर मैंग्रोव क्षेत्र में सफाई शुरू की। आज एनवायरमेंटल लाइफ से 90 लोग जुड़ चुके हैं जिन्हें मैंग्रोव सैनिक के रूप में जाना जाता है। 

15 अगस्त को मुहिम की शुरुआत 
धर्मेश ने कहा कि 15 अगस्त से इस मुहिम की शुरूआत की थी। हर रविवार को दो घंटे सफाई की जाती रही। बीते बुधवार को करीब three महीने में ही 7000 किलोग्राम कचरा हटा दिया। उन्होंने मैंग्रोव क्षेत्र से कचरा हटाने से पहले और बाद की तस्वीरें भी साझा की हैं।

धर्मेश कहते हैं कि हमने जो किया वह थोड़ा है लेकिन लोगों का समर्थन जबर्दस्त रहा। मैंग्रोव क्षेत्र कूड़ामुक्त होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने पर नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया। एनएमएमसी उपायुक्त बाबासाहेब राजले ने व्यक्तिगत रूप से धर्मेश बरई से संपर्क किया और उनके साथ मुहिम में शामिल हुए। 

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के मूल निवासी धर्मेश बरई के एक छोटे से समूह ने बड़ी पहल कर सेटेलाइट सिटी कही जाने वाली नवी मुंबई के समुद्री इलाके में मैंग्रोव क्षेत्र से 7000 किलोग्राम कूड़ा निकालकर बड़ी मिशाल कायम की है। इससे न केवल पर्यावरण अनुकूल माहौल बना बल्कि अब यहां राजहंस जैसे कई पक्षी खुलकर सांस ले पा रहे हैं और रैन बसेरा करते दिखाई देते हैं। अब तो इस क्षेत्र में फ्लैमिंगों पक्षियों का भी आगमन शुरू हो गया है।

बलरामपुर के धर्मेश बरई के छोटे समूह की बड़ी पहल

एनवारयरमेंटल लाइफ के संस्थापक धर्मेश बरई नवी मुंबई में रहते हैं। लेकिन वे बलरामपुर जिले में अतरौरा स्थित लालाडिहवा गांव के मूल निवासी हैं। उन्होंने नवी मुंबई के नेरूल में समुद्री प्रशिक्षण संस्थान टी.एस.चाणक्य से थोड़ी दूर स्थित करावे गांव के पास मैंग्रोव क्षेत्र को कूड़ा मुक्त करने की पहल की।

मछुआरों इसी कूड़े के रास्ते से होकर मछली पकड़ने के लिए जाते हैं। धर्मेश ने बताया कि रोशन भोसले और श्रीराम शंकर नामक दो क्लीनअप स्वयंसेवकों के साथ मिलकर मैंग्रोव क्षेत्र में सफाई शुरू की। आज एनवायरमेंटल लाइफ से 90 लोग जुड़ चुके हैं जिन्हें मैंग्रोव सैनिक के रूप में जाना जाता है। 

15 अगस्त को मुहिम की शुरुआत 
धर्मेश ने कहा कि 15 अगस्त से इस मुहिम की शुरूआत की थी। हर रविवार को दो घंटे सफाई की जाती रही। बीते बुधवार को करीब three महीने में ही 7000 किलोग्राम कचरा हटा दिया। उन्होंने मैंग्रोव क्षेत्र से कचरा हटाने से पहले और बाद की तस्वीरें भी साझा की हैं।

धर्मेश कहते हैं कि हमने जो किया वह थोड़ा है लेकिन लोगों का समर्थन जबर्दस्त रहा। मैंग्रोव क्षेत्र कूड़ामुक्त होने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने पर नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया। एनएमएमसी उपायुक्त बाबासाहेब राजले ने व्यक्तिगत रूप से धर्मेश बरई से संपर्क किया और उनके साथ मुहिम में शामिल हुए। 

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